लुधियाना –पंजाबी हेडलाइन (हरमिंदर सिंह किट्टी) दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMC&H) के न्यूरोलॉजी विभाग ने स्ट्रोक के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आधी रात को एक बुजुर्ग व्यक्ति अस्पताल पहुंचे, जिन्हें शरीर और चेहरे के दाहिने हिस्से में पूरी तरह लकवा हो गया था और वे बोलने में असमर्थ थे। यह सब दिमाग में जमे खून के थक्के (brain clot) की वजह से हुआ।
तेजी से इलाज, तुरंत राहत
डॉ. धनंजय गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं स्ट्रोक इंटरवेंशन विशेषज्ञ, और उनकी टीम ने तुरंत एंजियोग्राफी कर दिमाग से खून का थक्का सफलतापूर्वक हटा दिया।
डॉ. गगनदीप सिंह, प्रोफेसर एवं प्रमुख, न्यूरोलॉजी विभाग, ने इस सफलता को लेकर कहा,
“नौ घंटे के अंदर थक्का हटाना बहुत जरूरी था। मरीज पूरी तरह ठीक हो गया और अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से घर गया।”
DMC&H को उत्तर भारत का प्रमुख स्ट्रोक सेंटर बनाने का लक्ष्य
डॉ. जी.एस. वांडर, प्रिंसिपल, DMC&H, ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा,
“हम DMC&H को उत्तर भारत का सबसे बेहतरीन स्ट्रोक इलाज केंद्र बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।“
डॉ. बीरिंदर पाल और डॉ. मोनिका सिंगला ने भी त्वरित इलाज के महत्व पर जोर दिया और DMC&H की मेडिकल टीम की सराहना की।
अगर किसी को अचानक लकवा मार जाए या बोलने में दिक्कत हो, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।







