नई दिल्ली: बीएसएफ द्वारा स्वदेशी मुडहोल हाउंड नस्ल के कुत्तों की तैनाती को लेकर चल रही बहस के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय कुत्ता नस्लों को बढ़ावा देने की अपील ने इस ऐतिहासिक देसी नस्ल को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कई संबोधनों में जनता और सरकारी एजेंसियों से भारतीय कुत्ता नस्लों को अपनाने और स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ाने की अपील की थी। उनके “वोकल फॉर लोकल” और आत्मनिर्भर भारत के संदेश के बाद, मुडहोल हाउंड जैसी भारतीय नस्लें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित होने लगीं।
मुडहोल हाउंड—जो अपनी तेज़ रफ्तार, पैनी सूंघने की क्षमता और गर्म मौसम में सहनशक्ति के लिए जाना जाता है—अब कई सुरक्षा बलों द्वारा परीक्षण में है। कर्नाटक के मुडहोल क्षेत्र में इसे विशेष प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से संरक्षित और विकसित किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी की पहल से भारतीय नस्लों के प्रति लोगों की सोच बदली है। लंबे समय तक विदेशी नस्लें जैसे जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और बेल्जियन मेलिनोइस सुरक्षा कार्यों में प्रमुख मानी जाती थीं। लेकिन अब मुडहोल जैसी देसी नस्लों की लोकप्रियता और मांग दोनों बढ़ी है।
हालांकि बहस यह भी है कि सुरक्षा बलों में किसी भी नस्ल का चयन देशभक्ति की भावना से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और उपयोगिता के आधार पर होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देना स्वागतयोग्य है, लेकिन सुरक्षा में दक्षता सर्वोपरि है।
फिर भी, मुडहोल हाउंड का सफर—एक क्षेत्रीय शिकारी कुत्ते से राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक तक—देश में बढ़ती स्वदेशी चेतना का प्रतिबिंब है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं।







